चीन का
गुस्सा भारत कि ताकद
इस पुरे महिने मे
सबसे बडी खबर यही रही कि भारत और चीन के बोर्डर पे तणाव बढने के कारण युद्ध के
आसार नजर आ रहे है I यकिनन... हालाकी किसी भी किसम के तणाव का युद्ध यह सबसे
आखरी पर्याय यांनी के विकल्प होना चाहिये I और भारत कि कोशिश हमेशा से यही
रहती है कि युद्ध ना हो I फिर भी हमारे दुश्मन पडोसियोने चार बार हम पे युद्ध
थोपकर के हमे बदनाम कर दिया कि भारत जैसा शांतीप्रिय देश भी चार बार युद्ध कर चुका
है I मै चार कह रहा हू I क्योंकी मेरा मानना यही है कि कारगिल युद्ध हमने
पाकिस्तान के खिलाफ नही किया I बल्की आतान्कीयोन्से किया I उन्हे पाकिस्तान ने
भेजा था यह बात अलग है I लेकीन अधिकृत तौर से हमने पाकिस्तान के साथ कारगिल मे
युद्ध नही किया I और अब हमे चीन ने चुनौती दि है I हा चीन ने चुनौती दि है I हमारे
यहा तो मेडिया यही कह रहा है I कि चीन ने चुनौती दि है I लेकीन असल मे हुआ क्या था
और क्या हो रहा है? एक neutral stand लेके अगर हम इस घटना के बारे मे जानकारी लेने
कि कोशिश करेंगे तो हमे कई ऐसी चीझे पता चलेगी कि आप सोचेंगे “अरे यह तो हमे पता
हि नही था..”
चीन और भूतान का
बोर्डर I और एक जमीन का तुकडा, जिस के बारेमे दोनो देश कहते है कि यह हमारी जमीन
है I तो इस जमीन पे जहा तक चीन का कब्जा है वह हो गया चीन का हिस्सा I और जहा तक
भूतान कि सेना है वहां तक भूतान का हिस्सा I उस विवादास्पद जमीन पर अपनी अपनी
तरफसे दोनो कि सेनाये मौजूद है I साफ है कि कोई प्रदेश विवाद्स्पद हो तो वहा अपने
नखरे नही चलाने चाहिये I और ये दोनो तरफसे होता है. कि कोई किसी को उक्सायेगा नही
I फिर भी चीन अपने हिस्से के इलाके मे एक पक्की सडक बनाने कि फिराक्त मे था I
अभीभी है. क्यो? उसका कोई खास मक्सद होगा. और यह करते वक्त उन्हे लगा कि भूतान
इसपे क्या करेगा I यह जो एक कमजोर देश है I लेकीन शायद उन्हे भारत कि इसपे रिअक्शन
भी देखनी थी कि क्या हो सक्ती है I अब जब उन्होने जून महिने कि मध्य मे कोशिश कि
कि रस्ता बनाया जाये, भूतान ने उन्हे चेतावणी दि कि आप यह नही कर सकते I जब चीन ने
कहा कि हम ये कर सकते है क्योंकी ये हमारी जमीन है I क्योंकी हमने दावा किया है I
हमारे पास पेपर्स मौजूद है I जो १२० साल पुराने है I तो भूतान ने सीधे दिल्ली से
संपर्क किया और मदद मांगी I मदत इसलिये मांगी क्योंकी भूतान और भारत दोनो देशो मे
लिखित समझौता है कि अगर किसी देश ने भूतान पे हमला कर दिया तो भारत उसे अपने उपर
हमला समझेगा और उसकी मतलब भूतान कि रक्षा करणे लिये बद्ध रहेगा I और अगर भारत किसी
के साथ युद्ध करेगा तो भूतान भारत कि हर हाल मे पुरी सहायता करेगा I इस तरह का
समझौता भरत ने सिर्फ और सिर्फ भूतान के साथ किया है I इसी समझौते के अनुसार भारत
ने अपने कुछ हजार सैनिक डोकलम जहा येह सब
फसाद हो रहा है भेज दिये I
अब बात चीन से लडने कि थी तो जाहीर है सैनिक थोडे ज्यादा
भेजने पडे I अगर पाकिस्तान ने ऐसा कुछ किया होता तो कुछ सौ भी चल जाते I तो चीन को
लग रहा था कि भारत ज्यादा से ज्यादा कडी शब्दो मे निंदा करेगा I और कहेगा रास्ता
मत बनाओ भाई मेरे I लेकीन हुआ कुछ अलग I जैसे भूतान ने मदद मांगी भारतीय सेना सीधे
वहा गयी I और पुरे इलाके को सील किया I अब वहा हुआ क्या है यह बताना बहोत मुश्कील
है I मै अपनी राय रखता हू I मेरे हिसाब से जब भारतीय सेना वहां पहुची तो शायद जिस
इलाके मे चीन रास्ता बनाने कि कोशिश कर रहा था उसे भी कब्जे मे ले लिया I मतलब चीन
के अंदर कि तरफ I ये बतादु कि चीन और भूतान के बीच जो लाईन ऑफ कंट्रोल है वहा से
लेकर चीन के इलाके मे एक किलोमीटर कि दुरी पर चीन यह रास्ता बनाने जा रहा था I मतलब
भारत ने वहा जाके दिखा दिया कि सरकार सही मे बदल चुकी है I अर्थात यह मेरा खुदका खयाली
पुलाव है I शायद ऐसा हुआ हो I शायद ऐसा नही हुआ हो I माना तो जा रहा है कि भारतीय
फौज भूतान वाले इलाके मे हि मौजूद है I लेकीन मुझे ऐसा नही लगता I
तो इस भारतीय
आक्रमकता से चीन को जैसे एक सदमा सा लगा I क्योंकी भारत ऐसा कूछ करेगा इस्की
कल्पना नाही कि गयी I किसी ने भी I मै खुद इस स्टडीज मी काफी सालोंसे हू I मुझे भी
अचंबा हुआ I अब चीन धमकीयो पे धमकीया दिये जा रहा है, कि ऐसा करेंगे वैसा करेंगे I
यकिनन चीन कि सेना विशाल है I लेकीन भारतीय सेना को भी विशाल हि कहा जाता है I अगर
आपको पता ना हो तोः मै बतादू I भारत चीन के साथ मुकाबला कर सकता है I और ना सिर्फ
मुकाबला बल्की उन्हे मजा भी चखा सकता है I और ये मै पुरे होश मै कह रहा हू I मै पुरी
तरह से सहमत हू कि चीन कि सेना भारत कि सेना से कम से कम दुगनी बडी है I लेकीन
इसका मतलब यह नही कि भारत चीन से युद्ध हर जाएगा I चीन कि पुरी ताकद उसके दक्षिण
मे है I भारत के मुख्य भूमी से हजारो मिल दूर I अगर आप नक्षा देखोगे तो साफ पता
चाल जायेगा I भारत से युद्ध करणे हेतू चीन को हिंद महासागर मी आना पडेगा I अगर फिर
भी चीन अपनी आर्मी के जरीये उसी उत्तर भारत के दिशा से आक्रमण करणे कि कोशिश करता
रहेगा तो उन्हे बेहद भारी पड सकता है I क्योंकी भारत ने दक्षिण चीन मे विएतनाम
जैसे देशोन्को अपने विश्वास मी ले रक्खा है I वितेनाम भारत को चुपचाप मदत करता
रहेगा I और शायद खुलके भी I कहा नही जा सकता I बडे स्तर पर भारत के साथ युद्ध चीन
को मुश्कील मी डाल देगा I और ये चीन जाणता है I इसलिये तो सिर्फ धम्कीय दे रहा है
I अगर चीन मे भारत को हराने का आत्मविश्वास होता तो आक्रमक वो दिखते I भारत नाही I
उनका कहना है कि भारतीय सेनाने उनके प्रदेश मी प्रवेश किया है I और वोह वहासे पीछे
हटे I साफ पता चालता है. उन्हे डर है I किसी भी छेडखाणी के वजहसे बडा युद्ध छिड
गया और अगर दक्षिण चीन मे भारतीय नौसेना पाहोच गयी तो भारत को युद्ध मे हराने के
लिये चीन को अपने आण्विक हथियार इस्तेमाल करणे होंगे I जो तक्रीबन असंभव है I
क्योंकी आण्विक हथियार इस्तेमाल करने कि चीझे है हि नही ऐसा मै मानता हू I काफी एकसपर्टस
का मानना है कि भारतीय नौसेना चीनी नौसेना से अधिक सक्षम है I फिर भी बहोत सारे
लोग कहे जा रहे है I हसे जा रहे है I कि चीन के पास ६८ पनदुब्बीया है I और भारत के
पास सिर्फ १४ I फर्क बडा है I लेकीन क्या आपको पता है कि पंदुब्बी कि सबसे बडी
ताकद होती है उसकी छुपे रहणे कि क्षमता I एक बार पंदुब्बी दिख गयी या लोकेट हो गई,
तो उसको आसनी के साथ जल समाधी दि जा सक्ती है I भारत ने बडी चालाखी से चीन के इस
ताकद को भी शह दिया है I कैसे? मै बताता हू I भारत ने अपने नौसेना मी ऐसे एअरक्राफ्ट
और हेलिकॉप्टर्स बडी संख्या मे तैनात किये है जो खास करके पान्दुब्बियोन्को धुंडने
के लिये हि लडते है I इसके उदाहरण है, पी-८ एअरक्राफ्ट, कामोव-२८,२९,३१ सिरीस के
हेलीकॉप्तर्स I इन हथियारोके बारेमे आप गुगल कर सकते हो I चीन के पास भी कामोव्ह
हेलीकॉप्तर्स है I लेकीन चीन को इसका एहसास है कि भारत ने जान बुझ के अमेरिका से
पी-८ खरीदे है I पी-८ पन्दुब्बियोन्के खिलाफ इस्तेमाल किया जाणे वाला एक खास तरह
का एअरक्राफ्ट है I और ये अमेरिका ने सिर्फ भारत को सबसे पहले बेचा है I ऐसी बहोत
सारी बाते है जो भारत के पक्ष मे है I चीन येह सब कुछ बेहतर जाणता है I लेकीन गलत
प्रचार करना भी बहोत जरुरी होता है, कि हम भारत को आसनी से हरायेंगे I जब तक मोदी
पंतप्रधान बने रहते है, तब तक युद्ध का खतरा तो हमेशा रहेगा I क्योंकी लोगोंको
अंधेरे मे रखने कि उन्हे आदत नही I उन्हे प्रोब्लेम सुल्झाने मी इंटरेस्ट होता है
I नाकी उसपे बहस करने मे I किसी ने एक मारा तो वो दो मारनेकि बात करते है I और
हमारे पडोसियोन्को आदत थी येह देखने कि, कि भारत कुछ नही करता I लेकीन अब ऐसा नही
होना उनको गुस्सा दिलाने के बराबर है I चीन का गुस्सा यही एक कारण है I
लेखक :
विशाल बुलबुले (पुणे / सोलापूर)
vishalbulbule@yahoo.com